बिहार की पारंपरिक रेसिपी लिट्टी चोखा: स्वाद और विरासत का अनोखा संगम






बिहार की पारंपरिक रेसिपी लिट्टी चोखा: स्वाद और विरासत का अनोखा संगम

बिहार की पारंपरिक रेसिपी लिट्टी चोखा: स्वाद और विरासत का अनोखा संगम

भारत की विविधता उसके व्यंजनों में बखूबी झलकती है। हर राज्य की अपनी सांस्कृतिक एवं पारंपरिक रीति-रिवाज होते हैं, और इनका विशेष जगह हर राज्य की रसोई में भी दिखता है। ऐसे ही एक अनमोल खज़ाना है बिहार की पारंपरिक रेसिपी लिट्टी चोखा। यह व्यंजन स्वाद और संस्कृति का अनोखा मिश्रण है जो बिहार की समृद्ध विरासत को दर्शाता है। आइये, इस प्रसिद्ध व्यंजन के बारे में विस्तार से जानें।

क्या है लिट्टी चोखा?

लिट्टी चोखा बिहार वासियों का बहुत ही चहीता और लोकप्रिय व्यंजन है। इसमें लिट्टी और चोखा दोनों का अपना-अपना विशेष महत्व है। लिट्टी गेहूं के आटे से बनी गोल बॉल्स होती हैं, जिनके अंदर चना दाल या सत्तू का मसाला भरा जाता है। इन्हें कोयले की आंच पर या गैस पर भूना जाता है। चोखा बैंगन, आलू और टमाटर को भूनकर, मसालों के साथ पकाया जाता है और इसे लिट्टी के साथ परोसा जाता है।

लिट्टी बनाने की विधि

  • सामग्री: गेहूं का आटा, सत्तू, सरसों का तेल, जीरा, हरी मिर्च, नमक, अदरक, नींबू का रस, धनिया पत्ती।
  • विधि:
  • – आटे में थोड़ा नमक और पानी डालकर अच्छा सा गूंद लें और ढककर रख दें।
  • – एक बर्तन में सत्तू, जीरा, हरी मिर्च, अदरक, नमक, सरसों का तेल और नींबू का रस डालकर अच्छे से मिलाएं।
  • – अब आटे की गोल बॉल्स बनाएं और उनमें सत्तू का मिश्रण भरकर बंद कर दें।
  • – इन गेंदों को तंदूर में या गैस पर धीमी आंच पर सुनहरा होने तक पकाएं।

चोखा बनाने की विधि

  • सामग्री: बैंगन, आलू, टमाटर, सरसों का तेल, हरी मिर्च, अदरक, लहसुन, नमक, धनिया पत्ती।
  • विधि:
  • – सबसे पहले बैंगन, आलू और टमाटर को धीमी आंच पर अच्छी तरह भून लें।
  • – जब ये सब्जियां ठंडी हो जाएं तो इन्हें छीलकर छोटे टुकड़ों में काट लें।
  • – अब एक बर्तन में सभी सब्जियां, सरसों का तेल, हरी मिर्च, अदरक, लहसुन और नमक डालें और अच्छे से मैश कर लें।

लिट्टी-चोखा का इतिहास और महत्व

लिट्टी चोखा का इतिहास बिहार के पुराने समय में देखा जा सकता है जब यह व्यंजन किसानों और मजदूरों के लिए ऊर्जा बढ़ाने का साधन था। अपनी सरलता और पोषण से भरपूर होने के कारण यह न केवल बिहार बल्कि उत्तर प्रदेश, झारखंड और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी विख्यात हो गया। यह व्यंजन अब बिहार की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है। लिट्टी चोखा विशेष अवसरों और त्योहारों पर बिहार के पारंपरिक आनंद का हिस्सा होता है।

लिट्टी-चोखा के स्वास्थ्य लाभ

  • पोषण से भरपूर: लिट्टी चोखा में उपयोग किए जाने वाले सभी सामग्री जैसे सत्तू, सब्जियाँ और मसाले पोषण से भरपूर होते हैं।
  • वजन नियंत्रण: सत्तू की उच्च फाइबर सामग्री का यह लाभ होता है कि यह पेट को अधिक समय तक भरा रखता है, जिससे वजन नियंत्रित करने में मदद मिलती है।
  • शरीर की ऊर्जा बढ़ाएं: गेहूं और सब्जियों की पौष्टिकता के कारण यह व्यंजन शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है।

आधुनिक परिवेश में लिट्टी चोखा

हालांकि लिट्टी चोखा की मूल विधि वर्षों से वही रही है, लेकिन आज के समय में इसकी प्रस्तुति और प्रकार में थोड़ा आधुनिक बदलाव आया है। आजकल कई रेस्टोरेंट और ढाबे इसे अपने मेन्यू में शामिल कर चुके हैं और इसमें कई प्रकार के चोखा, जैसे बैंगन के साथ आलू-टमाटर का चोखा, लौकी चोखा आदि, प्रस्तुत करते हैं।

इसके अलावा, लोग इसे और भी आकर्षक बनाने के लिए लिट्टी को बेक करके या डीप फ्राई करके भी परोसते हैं, जो कि स्वाद में विभिन्नता जोड़ता है। यह व्यंजन अब सिर्फ बिहार तक ही सीमित नहीं है बल्कि पूरे देश में इसकी लोकप्रियता बढ़ रही है।

समापन

लिट्टी चोखा एक ऐसा व्यंजन है जो न केवल भोज्य पदार्थ के रूप में बल्कि संस्कृति और इतिहास का भी प्रतिनिधित्व करता है। इसकी सरलता और पोषण के साथ-साथ स्वाद का अनोखा संगम इसे हर किसी का पसंदीदा बनाता है। बिहार की गलियों से उठकर यह व्यंजन आजदुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अपनी पहचान बना चुका है। अगर आपने अब तक इस स्वादिष्ट व्यंजन का अनुभव नहीं किया है, तो अगली बार इसे जरूर अपने भोजन में शामिल करें और बिहार की इस अनोखी विरासत का हिस्सा बनें।


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